Metaverse क्या है और कैसे काम करता है | How Metaverse Works?

Metaverse क्या है और कैसे काम करता है

नमस्कार दोस्तों इमेजिन करो आप अपने परिवार से दोस्तों से मिलते हो लेकिन असलियत नहीं बल्कि एक नकली थ्रीडी दुनिया में जो आर्टिफिशियली बनाई गई है।

अब इस दुनिया के अंदर आप घुसते हो अपने कमेरे में बैठे बैठे एक स्पेशल हेडसेट या ग्लासेस लगाकर।

सिमिलरली आप काम करते हो स्टडी करते हो, शॉपिंग करते हो, ऑलमोस्ट वो सारी चीजे करते हो जो आप असली दुनिया में करते हो लेकिन आप असली दुनिया में नहीं करते बल्कि इस नक़ली आर्टिफिशियली दुनिया में करते हो अपने कमरें में बैठे बैठे अपने स्पेशल हेडसेट या ग्लासेस लगाकर।

सुनकर कैसा लगता है थोड़ा डिप्रेसिंग सा लगता है ना, अब दोस्तो ऐसा ही कुछ बताया जा रहा है आने वाले टाइम में होगा मेटावर्स।

जिसे कहा जाता है कि यह एक ऐसी टेक्नोलॉजी होगी जो आने वाले टाइम में इंटरनेट को रिप्लेस कर देगी और इंसानियत का फ्यूचर बनेगी।

What is Metaverse in Hindi

What is Metaverse in Hindi

मेटावर्स वर्ड्स दो शब्दों से बनता है मेटा और वर्स मेटा जो शब्द है ये ग्रीक से आया है ये एक प्रीफिक्स है जिसका बेसिकली मतलब है बियोंड परे और वर्स जो शब्द है वो यूनिवर्स से ही लिया गया है।

तो हमारा एक यूनिवर्स होता है और यह एक मेटावर्स होगा जो अपने यूनिवर्स के परे होगा, बेसिकली इस शब्द का हम इस्तमाल करते है एक आर्टिफिशियल दुनिया के लिए।

वैसे इसिसे ही रिलेटेड आपको और एक शब्द सुना सुनासा लगा होगा मल्टीवर्स जो स्पाइडर मैन के लेटेस्ट फिल्म में भी बताया गया था।

मल्टीवर्स एक ऐसा कांसेप्ट है की असल मे बोहोत सारे यूनिवर्स एक्सिस्ट्स करते हैं एक ऐसी जिसे साइंटिफिकली भी डिस्कस किया जाता हैं कुछ लोगो का मानना है कि हमारे ब्रह्मांड में सिर्फ एक यूनिवर्स नही है बल्कि बोहोत सारे यूनिवर्सेस हैं इसलिए इसे मल्टीवर्स कहा जाता है।

लेकिन एनीवेज मेटावर्स का यहां पर मतलब है की आर्टिफिशियली बनाई गई दुनिया।

अब कहने को तो इंटरनेट भी अपनी एक दुनिया है लेकिन इंटरनेट पर जब आप जाते हो तब आप टू डिमेंशंन में जाते हो मोस्टली अपने फोन का इस्तमाल करते हो या कंप्यूटर का इस्तमाल करते हो।

लेकिन जब मेटावर्स की बात की जाति है तो मेटावेर्स एक ऐसी दुनिया है जिसके अंदर पूरा घुसा जा सकते हो थ्री डिमिंशन से।

जैसे की अगर आप एक फिल्म देखते हो आप फिल्म बैठे बैठे ऐसे नही देख रहे हो की दूर से देख रहे हो बल्कि आप फिल्म के अंदर घुस जाते हो।

मान लो दांडी मार्च होते हुए देख रहे हो आप उसको सिर्फ फोटो मे देख रहे हो सिर्फ दांडी मार्च का वीडियो नही देख रहे हो बल्कि आप पास वाली बोट में बैठकर एक्चुअली में दांडी मार्च होते हुए देख रहे हो।

या फिर क्रिकेट का कोई मैच आप देखते हो टेलीविजन पर टू डिमिंशंस में लेकिन टेक्नीकली अगर हम वर्चुअल्टी का इस्तमाल करे तो आप थ्री सिक्स्टी डिग्री चारो तरफ आप अपने आस पास क्रिकेट मैच होते हुए देख सकते हो।

ओर ऐसी फीलिंग बनाई जा सकती है, कोशिश की जा सकती है की मान लो आप असली में ही मैच देख रहे हो।

इस मेटावर्स शब्द का एक्चुअली में पहिली बार इस्तमाल किया गया था साल नाएंटी नाएंटी टू में एक साइंस फेक्शन किताब स्नो क्रैश मे।

जो की नील स्टीफेंस सर ने लिखी थी इस नोवेल ये बात करते है एक डिस्टोपियन दुनिया की इस ऐसी दुनिया जहा पर असली जिंदगी पूरी तबा हो चुकी है बाहार की दुनिया जीने लायक नहीं बची है इंसानो के लिए तो हर कोई अपने कमरों में अपने बिल्डिंगो के अंदर घुसकर रहता हैं एक वर्चुअलरियलिटी में जिंगदी बीताता हैं।

तो इसी वर्चुअल रियलिटी के लिए आर्टिफिशियल दुनिया के लिए उन्होंने मेटावर्स शब्द का इस्तमाल किया था।

इसके बाद एक गेम भी आया था साल दो हजार तीन में सेकेंड लाईफ करके यहा पर कंप्यूटर में आप इस गेम को खेल सकते थे और कंप्यूटर के अंदर आप अपनी दूसरी जिंदगी बना सकते थे।

लोगो से मिलना वर्चुअली आयटम्स को खरीदना जो एक्चुअली में गेम के अंदर प्रॉपर्टी को खरीदना वहा पर गुड एंड सर्विसेस को एक्सचेंज करना और अपने रियलास्टिक दिखने वाले अवतार्स को बनाना।

वैसे इंट्रेस्टिंग फैक्ट्स है यहा पर जो अवतार शब्द है इसे भी पहिलि बार पॉपुलराइज किया था इसी स्नो क्रैश की नाएंटी नाएंटी टू वाले नोवेल ने एक्चुअली में ये शब्द हिंदी या संस्कृत से आता है।

अवतार जब हम कहते है की किस कहानी में यह इंसान किसी भगवान का अवतार है सिमिलरी याहा अवतार शब्द का इस्तमाल किया गया।

ये जो वर्चुअल रियलिटी के अंदर कैरेक्टर्स है आप अपने बना सकते हो वो आपके अवतार बन सकते हैं जैसे मार्स सकरबर्ग का कार्टून ये खुद बना रहे है थ्रीडी में ये थ्रीडी कैरेक्टर मार्स सकरबर्ग का अवतार है।

ऑब्यूसली बाकी दुनिया में शब्द और भी ज्यादा पॉपुलर हो गया था जब दो हजार नो में ये अवतार फिल्म आई थी।

अब रिसेंटली बात करे तो कई कंपनीज है जिनोंने अपने वर्चुअल वर्ड मेटावर्स बनाने की कोशिश करी है लेकिन फिर से इस शब्द को पॉपुलर किया गया फेसबुक के द्वारा, जब फेसबुक ने डिसाइड किया की वो अपने कंपनी का नाम ही बदलकर मेटा कर देगें।

कहा की हम मेटावर्स को अडॉप्ट करना चाहते हैं हम एक सोशल मीडिया कंपनी से मेटावर्स कंपनी बनना चाहते है।

अब मार्क का बस चलता तो ये कहते की खाना खाना और टॉयलेट जाना भी मेटावर्स में ही कर लो, क्योंकि जितना ज्यादा आप मेटावर्स में रहोगे उतना जाडा ये डेटा आपके उपर कलेक्ट कर पाएंगे और उतने ही ज्यादा फिर पैसे कमा पाएंगे।

वैसे इसकी बारेमे बात आगे लेख में करते हैं इसके क्या नुकसान हो सकते है क्या यहा पर खतरा है पहिले ये देखते हैं कि मेटावर्स एक्चुअली बनता किससे है।

Technology of Metaverse in Hindi

यह पर कई अलग अलग टेक्नोलॉजीज है जो मेटावर्स को एक्चुअली में बनाने लग रही हैं।

पहिली है वर्चुअल रियलिटी ये टेक्नोलॉजी आज के दिन ऑलरेडी एक्सिस्ट करती हैं लेकिन इसे इस्तमाल करने के लिए आपको बड़े भारी भरकम से हेडसेट्स पहेंने पड़ते हैं जीनको आपने आधे घण्टे से ज्यादा लगाकर रखे तो सिर मे दर्द होने लग जाता हैं मोशन सिकनेस हो जाती है।

उपर से जो आपको आज के दिन ये वर्चुअल रियलिटी हेडसेट में देखता है के जिस लेवल तक टेक्नोलॉजी आज के दिन पोहोच पाई है वो काफी खराब है।

जो एनिमेशन की क्वॉलिटी इन वर्चुअल रियलिटी गेम्स में देखते हो या फिर जो वीडियो आप इनके अंदर देख रहे होते हो वह इतनी रियल नही दिखती।

हालाकि की ये एक ऐसी चीज है जो टाइम के साथ साथ डिफेनेटली इंप्रूव होएगी लेकिन उम्मीद ये भी लगाई जा रही है कि जो बड़े बड़े भारी भरकम हेडसेट्स है जो आने वाले टाइम मे टेक्नोलॉजी इतनी इंप्रूव हो जाएगी की ये और पतले होते जाए छोटे होते जाए और इवेंक्चुअली एक आम चश्मे के साइज के बन जाए।

इन्हे पहनना उतारना उतना ही आसान होता जाए जितना एक चश्मे को पहनना और उतारना होता हैं क्या एक्चुअली में ऐसा हो भी पाएगा ये तो टाइम ही बताएगा।

दूसरी टेक्नोलॉजी यहां पर ए आर के एक्यूमेंट्रिक रियलिटीक इसका मतलब है कि हमारी असली दुनिया के साथ कुछ आर्टिफिशियल एलिमेंट्स मिक्स किए जायेंगे।

यह पर सुबकुछ वर्चुअल रियलिटी नही होगी इसका एक बढ़िया एग्जांपल है पोकेमोन गोस स्मार्ट फोन गेम जिसमे आप स्मार्ट फोन के जरिए आप अपनी पीछे की असली दुनिया को देख सकते हो पर जब स्मार्ट फोन के थ्रू देखते हो तब आपको उसमे आर्टिफिशियल पोकेमोन दिखाई देते है जो की ऐसा लगता है कि वो आपकी असली दुनिया के साथ मिक्स होकर खड़े हैं।

एक और अच्छा एग्जांपल इसका है एक टाइम पर गूगल ग्लास याद है आपको एक ऐसा प्रोडक्ट जो कब आया और कब चला गया किसको पता ही नही चला लेकिन गूगल ग्लास दो हजार तेरा चोदा के टाइम बोहोत बड़ी हाइट बना था।

ऐसे ग्लासेस जीने पहनकर आप असली दुनिया मे कुछ वर्चुअल एलिमेंट्स ऐड कर सकते हो आप जब सामने सड़क पर देखेंगे तो आपको साइड में कोने में उन ग्लासेस के जरिए मैप दिखाई दे सकता हैं।

कैमरे पे आप किसी से बात कर सकते हैं सामने देखते देखते सामने चलते चलते इसको बोहोत क्रिटिसाइज भी किया गया था इन्फैक्ट इस चीज का इतना मजाक बनाया गया था की इवेंचुअली ये गूगल ग्लास बोहोत बड़ा फोल्फ्प रहा।

एसके अलावा मेटावर्स में फाइव जी टेक्नोलॉजी की भी बात करी जाती हैं क्योंकि अगर हम इतनी बड़ी वर्चुअल दुनिया बनानी है तो कांस्टली बोहोत सारा डेटा अपलोड डाउनलोड करते रहना पड़ेगा जिसके लिए बोहोत ही हाई इंटरनेट स्पीड की जरूरत होगी।

तो फाइव जी की जरूरत होगी साथ ही साथ ब्लॉक चैन और क्रिप्टोकरेंसी का भी मेंशन होता है जब मेटावर्स की बात करी जाती है तो जब मेटावर्स में कुछ भी खरीदने के लिए पैसे स्पेंड किए जायेंगे वो असली के पैसे तो हो नहीं सकते क्योंकि सब कुछ डिजिटल है।

तो कोई न कोई डिजिटल करेंसी ही हो सकती हैं और यह पर रोल आता है क्रिप्टो करेंसिस का और क्योंकि कॉन्स्टली बोहोत सारी ट्रांसजेशन करी जायेंगी उन्हें सिक्योर रखना पड़ेगा।

यह पर हैकर्स का भी खतरा रहेगा डेटा ब्रिगेड होने का भी खतरा रहेगा तो इन सबको सिक्योर रखने के लिए फिर रोल आता है ब्लॉक चैन का।

इसके अलावा अगर आपको इस मेटावर्स में कोई जमीन खरीदनी है या प्रॉपर्टी खरीदनी है या कुछ भी एसेट खरीदना है मेटावर्स के अंदर यैसे कहा जाता है कि यह किया जाएगा येन एफ टीस के द्वारा।

नॉन फंजेबल टोकंस न एफ टी को आप एक तरीके का टोकन समझ लो जो ब्लॉक चैन पर रहता है और किसी भी डिजिटल एसेट की ऑनर शिप प्रूव कर सकता है।

आपको पास ये डिजिटल जमीन आप ओन करते हो मेटावर्स के अंदर इसका प्रूफ क्या है न एफ टी एस का प्रूफ।

आज के दिन लोग इसका इस्तमाल करते है मॉम्स की ऑनर शिप भी खरीदने के लिए बेचने के लिए एक कॉन्सर्ट के टिकेट को वेरिफाई करने के लिए भी न एफ टी का इस्तमाल किया जा सकता हैं।

अगर कोई वर्चुअली मेटावर्स के अंदर कॉन्सर्ट करने लग रहा है वैसे ये ऐसी चीज जो ऑलरेडी कुछ सिंगर कर चुके है वर्चुअल रियलिटी कॉन्सर्ट जिसमे वो एक डिजिटल स्टेज पर जाके खड़े होते है गाना गाते हैं और आप उनको एनिमेटेड फिगर्स की तरह हिलते हुए देखते हो।

गाने सुनते होंगे वहा पर भी इसका इस्तमाल किया जा सकता हैं पिछले साल सितंबर में सिंगर आर्यना ने यह किया था फोर्ट नाइट में वर्चुअली परफॉर्म करके।

हालाकि की ये सारी टेक्नोलोजिस एक बेसिक लेवल पर ऑलरेडी इंडियुजवली एक्सिस्ट करती हैं लेकिन इस सब को साथ में मिलकर एक सही माहीनो में मेटावर्स बनाने में अभी काफी समय लगेगा।

मार्क जकरबर्ग इंस्टीमेट करते है कि कम से कम पाच से दस साल का समय लगेगा।

मेटावर्स के फीचर्स है वो मैन स्ट्रेंस का हिस्सा बन पाए कई और एक्सपर्ट का मानना है कि एक्चुअली में कई दशक लग जायेंगे इससे पहले की ये मेटावर्स जैसी चीज इतनी पॉपुलर बन पाए की मेजॉरिटी लोग इसकी इस्तमाल करने लगे।

बोहोत से लोग यह पर मानते है की मेटावर्स तो इनेवटेबल है मतलब ये टू होना ही होना है इंटरनेट के बाद अगली बडी चीज ये मेटावर्स ही होगा।

लेकिन के क्रिटिकल सवाल यहा पर उठता है क्या यह मेटावर्स सक्सेसफुल भी हो पाएगा क्या किसने इसकी डिमांड भी करी है किसीको ये चाहिए भि और ये बड़ा ही इंटरेस्टिंग सवाल है।

क्योंकि अगर आप गूगल ग्लासेस जैसी टेक्नोलॉजी को देखोगे तो उसे काफी ज्यादा पॉपुलर बनाने की कोशिश करी गई थी दो हजार चोदा के अराउंड बोहोत से सेलिब्रेटी उसे पहनकर घूम रहे थे इनफ्लूएंसेस को दिए गए थे लोगों ने अपने टेक रिव्यूव बनाए इसे देखते हुए की ये कितने कुल है।

लेकिन इवेंचुअलि ये गूगल ग्लासेस फोल्फ हो गए कई रीजन इसके पीछे बताए जाते है उनमें से एक रीजन थे की इनकी बैटरी लाइट सिर्फ तीन घंटे की होती थी दिखने में ये बड़े अजीब से थे इनमें प्राइवेसी का भी इश्यू था क्योंकि इन पर कैमरा लगा होवा था और कई जगह ने तो ऑलरेडी इस बैन करना शुरू कर दिया क्योंकि लोग इन्हें पहनकर आते और पता नही कोन कब रिकॉर्ड कर रहा है किसीको तो।

कई देशों ने इन्हे बैन कर शुरू कर दिया था तो अगर आप हमारे रेस्टोरेंट बार में आ रहे हो आप इन्हे पहनकर नही आ सकते।

लेकिन मेरी राय मे इन सबसे भी बोहोट इंपोर्टेंट रीजन था की गूगल ग्लास फैल क्यों होए क्योंकि इनमें ऐसा कोई भी फीचर नही था जिसकी लोगों को जरूरत हो।

मतलब हा देखने में काफी कुल लग रहा था की देखो ऐसी टेक्नोलॉजी एक्सिस्ट्स करती हैं और जिन लोगों पास ये थे वो बड़े शो ऑफ करके देखा सकते थे देखो ये ग्लास ये कर सकता है वो कर सकता है लेकिन एक्चुअली में रीयल लाइफ यूज नाके बराबर था इसका जो।

आप गूगल ग्लास पे कर सकते थे वो सब ऑलरेडी आप अपने स्मार्ट फोन में भी कर सकते है स्मार्ट फोन पे और अच्छे से कर सकते थे वो सारी चीजों को मैप देखना हुवा या फिर वीडियो कॉल पर बात करना हुवा।

अभी चश्मे पहनकर या कोने कोने से ये कर सकते हो आप करने को क्यों ना आप फोन निकला पॉकेट से और उसीसे ही करने लग गए, तो बेसिकली कोई यूज केस नहीं बना इस गूगल ग्लास का।

सिमिलर्ली मेटावर्स के बारे मे भी ऐसा ही कहा जा सकता है एक बार ये ट्राई आउट करने मे बड़ा कुल लगता है की देखो मैं थ्रीडी वर्चुअल इनवायरमेंट में बैठकर सबसे बात करने लग रहा हूं हम यह पर थ्रीडी मीटिंग करने लग रहे हैं।

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लेकिन रियलिस्टिकली इतना जनझट कोन उठाए की यह पर ग्लासेस पहेनो और सबको थ्री डी इस पर बोलवो इससे अच्छा तो फोन निकलो और जैसे नॉर्मली वीडियो कॉल करते है वैसे कर लो।

वो करना ज्यादा आसान है यह पर इसकी इतनी बड़ी तैयारी कोन करे सेम चीज अगर दोस्तो से मिलना हुवा एक्चुअली में तो रीयल लाइफ में तो मिल ही सकते हो लिकिन अगर वर्चुअली में भी मिलना चाहो तो वीडियो कॉल करलो उनसे या मैसेजिंग पे बात कर लो उनसे।

यार इस स्पेशल थ्रीडी दुनिया में आकर क्या एक्स्ट्रा मिल रहा है जो टेक्नोलॉजी सबसे ज्यादा पॉपुलर होती है लोगों में वो सबसे ज्यादा आसान भी होती है यूज करने में और एक क्लियर बेनिफिट प्रोवाइड करती है यूजर्स को।

अगर ऐसा नहीं होगा तो बड़ा मुश्किल है एक टेक्नोलॉजी मैन स्ट्रीम बन पाएगी इसका और एक एग्जांपल है थ्रीडी ग्लासेस एक टाइम होता था जब की थ्रीडी बिलकुल नया ट्रेंड बन गया था की हर फिल्म जो आ रही है वो थ्रीडी मिक्सचर आने लग रही हैं।

आज के दिन भी बोहोत थ्रीडी पिक्चर आती हैं लेकिन मैं उस टाइम की बात कर रह हु जब थ्रीडी टीवी भी बोहोत पॉपुलर हो गए थे की भाई अब तो आपूण घरमे में भी हम थ्रीडी टीवी लगवाएंगे सुनकर बड़ा कुल लगता है कि देखो मेरे घर में तो थ्रीडी टीवी लगा है।

लेकिन आर रियलिस्टकली कितना झंजहट है कि यह पर हमेशा ग्लासेस लगावो टीवी देखने के लिए भी कोई इतना झंझट नहीं लेना चाहता चीजों को सिंपल रखना चाहिए चीजे वही सक्सेसफुल होगी जो सिंपल होगी।

अगर आपके पास ज्यादा सिंपल ऑप्शन यह है कि आपको टीवी देखना है तो बस टीवी ऑन करो और देख लो तो थ्रीडी को भूल जाएंगे आप उपर से थ्रीडी ग्लासेस पहनके थोडासा ज्यादा आइस स्टेन और थोडासा ज्यादा हेड्टेक होता है।

वो भी काफी लोगों के लिए अनएक्सेप्टेबल होता है यही रीजन है कि एक्चुअली में थ्रीडी मूवीज की पॉपुलैरिटी भी गिरती जा रही है।

सिनिमा है वापस अब लोग रेफर करने लग रहे है टू डी मूवीज को देखना क्योंकि कोई इतना एडिशनल बेनिफिट नहीं है थ्रीडी मूवीज देखकर, और जो ग्लासेस के बंधे रहने की फिलिंग आती है जो आखों पर स्ट्रेन आता है वो वर्थिट नही है।

वो एडिशनल एडवांटेज के लिए जो थोडासा ज्यादा थ्रीडी देखता है दूसरा पायंट ऑफ क्रिटिसिम शायद यह पर इससे भी बड़ा है क्या हम सही में अपनी असली जिंगदी से इतना जुदा होकर रहना चाहते है कि हम हम असली में जीना ही भूल जाय।

हम अपनी पूरी जिंदगी इस फेक आर्टिफिशियल दुनिया में ही बीता दे अगर ये वर्चुअल दुनिया इतनी ज्यादा ईडेक्टिव और इतनी ज्यादा एमर्सिव बन जाएगी तो लोग कही न कही असली दुनिया की फिकर करना छोड़ देंगे।

जो की बोहोत ही डिस्टोपियन चीज है मतलब बोहोत ही डिप्रेसिंग चीज है और जो स्नो क्रैश किताब मैंने बताई थी वो एक्चुअली में एक डिस्टोपियन नोवेल थी वो कोई इंस्प्रिरेशन लने वाली चीज नही थी की हम ऐसा कुछ बनाना चाहिए।

वो मेटावर्स को कही न कही एक नेगेटिव लाइट में ही दिखला रही थी तीसरी प्रोब्लम यह पर है फेसबुक और मार्स सकरबर्ग स्पेसिफिक है यह पर जो प्राइवेसी और डेटा चोरी का खतरा है फेसबुक पर वैसे ही आपको हर तरीके के से ट्रैक किया जाता है।

की एक्सटैकली कहा पर क्लिक करते हो किस चीज पर आप लाइक कर रहे हो किसे फॉलो कर रहे हो उसके बेसिस पर आपको सिमिलर सी चीजे दिखाई जाती हैं जिसकी वजह से यहा पर एक बबल्स क्रिएट होते हैं।

की आप अपने ही दुनिया में रहते हो जिन चीजों को आप पसंद करते हो सिर्फ वही चीजे दिखाई जाती हैं जिसकी वजह से इनवेंचूअली होता क्या है असली जिंदगी में हमे दंगे देखने को मिलते है यहां पर पोलोरायजेशन होती है लोगों कीलेफ्ट विंग राइट विंग ये धर्म वो धर्म ये पॉलिटिकल पार्टी वो पॉलिटिकल पार्टी लोग लड़ने लग जाते है।

और लिटरली रीयल लाइफ में राइट्स जो मियांग बात में जेनोसिईड हुवा था उसका ब्लेम काफी हत तक फेसबुक पे डाला गया था क्योंकि अगर मार्स सकरबर्ग भी यहा पर मेटावर्स को बनने की बात करते है तो यही चीजदस गुना सौ गुना ज्यादा बड़ जाए क्योंकि मेटावर्स में यह चाहते की आप काम भी करी दोस्तों से बात भी करो आपकी हर मूवमेंट ट्रैक करी जायेगी।

हर एक एक शब्द जो आप कहते हो ये ट्रैक करेंगे एड बेचने के लिए आपको आप जो चीजे पसंद करते हो वही चीजे आपको फिरसे दिखाई जाएंगी यही चीज आप एक और भी बडे स्किल पर इमेजिन कर सकते हो।

कितनी खतरनाक होगी उपर से एक ऐसी वर्चुअल दुनिया बनाई जा रहि है एक नया यूनिवर्स टाइप का बनाया जा रहा है यहां पर एक कंपनी द्वारा बनाया जा रहा है।

सोचकर देखो उस एक यूनिवर्स का मालिक यहां पर मार्स सकरबर्ग बन जायेगा असली दुनिया में कम से कम कोई ऐसा मालिक नहीं होता यहां पर तो लिटरली मेटावर्स का भगवान बन जायेगा मार्स सकरबर्ग अगर ये हर चीज पर कंट्रोल रखने लग गया तो।

अगर सही माहीनों में मेटावर्स सक्सेसफुल हो गया मतलब मान लो साठ पर्सेंटे पॉपुलेशन दुनिया की इसे इस्तमाल करती है और हर चीज करने लगे मेटावर्स के अंदर तो सोचकर देखो कितनी पावर होगी।

उसे एक इंसान के पास उसे एक कंपनी से पास जो इस मेटावर्स के हिस्से को ज्यादा तर ओन करके रखती हैं अपने आप में ही कितनी अनएथीकल और भयंकर चीज है।

यहां पर आपकी क्या राय है मेटावर्स के बारे में आपको क्या लगता है आने वाले टाइम में क्या यह पॉपुलर बनेगा नीचे कमेंट में लिखकर बताए मेरी पर्सनल राय पोचोगे तो मुझे लगता है कि कुछ टेक्नोलॉजीज होगी जो आने वाले टाइम में डिफेनेटली पॉपुलर बनेंगी लेकिन वो अपने अलग अलग सेक्टर में पॉपुलर रहेंगी।

फॉर एग्जांपल जो ए आर के टेक्नोलॉजी है ऑकमेंटेड रियलिटी मुझे लगता है इसका बोहोत ही अच्छा यूज कर सकते है, हो सकता है एंजनेरिंग में या आरके टेक्चर में या मेडिशीन के फील्ड में जहां पर आपको सही माहीनो थ्रीडी इस्तमाल करना पड़ता है।

और थ्रीडी मॉडल्स का इस्तमाल किया जाना आपके काम को और एफिशिएंट बनाएगा और बेहतर बनाएगा स्पेशली आप थ्रीडी मॉडल्स के साथ इंटरैक्ट कर पाए तो कई बिजनेस एरिया में और काम के एरिया में मुझे लगता है इसका सही माहीनों में पोटेंशियल है, उम्मीद करता हूं आपको यह लेख Metaverse क्या है और कैसे काम करता है | How Metaverse Works? इनफॉर्मेटिव लगा हो, मिलते है अगले लेख में बोहोत बोहोत धन्यवाद।

नमस्ते दोस्तों मेरा नाम Akash Sawdekar है the24hindi.com का Author हु। दोस्तों मुझे Internet पर जानकारी पढ़ना बोहत पसंद है, अगर आपको भी मेरी तरा जानकारी पढ़ना अच्या लगता है तो आप इस Site को Subscribe कर सकते हो धन्यवाद।

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