How Solar Energy is Produced in Hindi

How Solar Energy is Produced in Hindi

हम सबके घरों में इलेक्ट्रीसिटी की कितनी जरूरत होती है ये बताने की बिलकुल भी जरूरत नहीं हैं क्योंकि आज वो टाइम तो रहा नहीं जो बिना लाईट के डेली रूटीन वर्क आसानी से किए जा सके आज तो जरा सी भी लाईट अगर गुल हो जाए तो हम पॅनिक हो जाते है।

क्योंकि आज के इस ग्याजेट और एप्लायंसेस वाले लाईफ स्टाईल में सबकुछ हा लगभग सबकुछ इलेक्ट्रिसिटी से ही चलता है फिर चाहे पंखा कूलर और एसी हो या फिर कंप्यूटर फ्रीज या टीवी हो।

ऐसे में इलेक्ट्रिसिटी का यूज भी ज्यादा होता है और फिर इलेक्ट्रिक सिटी बिल भी काफी लंबा चौड़ा आया करता है जो अपसेट करने के लिए और मंथली बजेट को गड़बडा ने के लिए काफी होता हैं।

ऐसी में एक उम्मीद की किरण तो है जो की इस मुश्किल से निकल सकती हैं और उस किरण का रिलेशन आसमान के उस सूरज से है जी हा जिसकी किरने हमे इलेक्ट्रिक एनर्जी प्रोवाइड कराती है।

तो क्या आप कुछ समझे की मैं किस तरफ इशारा कर रहा हूं हा बिलकुल मैं सोलार एनर्जी की ही तरफ इशारा कर रहा हूं। जो हमे सूरज से मिलती हैं हर रोज मिलती है और इतनी मिलती है की इसे आसानी से यूटिलाइज करके घर का और अपने बिजनेस का बिजली का बिल संभाला जा सकता हैं।

यानी अपने घर पर सोलार प्यानर लगाकर इलेक्ट्रिक बिल को कम किया जा सकता हैं और इसके साथ साथ एनवायरमेंट को भी सपोर्ट किया जा सकता हैं।

क्योंकि सोलार पावर क्लीन एनर्जी फ्यूचर की तरफ ले जाती है और फिर हर दिन सन जितनी एनर्जी हमे देता है वो हमारी जरूरत से कई ज्यादा ही होती हैं।

सोलार एनर्जी ऐसा रिन्यूवल एनर्जी सोर्स है जो लिमिटलेस है और ये ऑइल गैस और कोल जैसे फॉसिल फूल्स की तरह जल्दी ही खतम होने वाला भी नहीं हैं, इसके जरिए करंट क्लाइमेट क्राइसेस को हैंडल किया जा सकता हैं।

और फॉसिल फूल्स पर जो डिपेंडेंसी है उसे भी काफी कम किया जा सकता हैं इससे किसी भी तरह का एयर वॉटर या नॉइस पॉल्यूशन भी नहीं होता।

हालाकि सोलार फैनल्स की मैन्युफैक्चरिंग सेटअप और डिस्पोसल से थोड़ा पॉल्यूशन जरुर होता है और हम उम्मीद कर सकते है कि ये प्रोब्लम भी जल्दी ही सॉल्व हो जाएगी।

और फिर ये भी तो देखिए कि सोलार फैनल जब इलेक्ट्रिक सिटी क्रिएट करते है तब एटमॉस्फियर में कोई ग्रीन हाउस गैस नहीं निकलती हैं और इस यूटोफ्री पॉवर सोर्स की इंपोर्टेंस इंडिया में भी बढ़ती ही जा रही हैं।

Solar Energy India

क्योंकि यहां सनलाईट बोहोत असानी से मिल जाती हैं और ऐसी टेक्नोलॉजी भी अवेलेबल होने लगी है जो इस सोलार एनर्जी को इलेक्ट्रिक पॉवर में कन्वर्ट कर सके, और आपको यह जानकर खुशी भी होगी की इंडियन रिन्यूवेबल एनर्जी सेक्टर वर्ल्ड मे फोर्थ मोस्ट अट्रैक्टिव रिन्यूवेबल एनर्जी मार्केट बन चुका हैं और सोलार पॉवर में इसकी फिफ्थ रैंकिंग हैं।

सोलार एनर्जी इंडिया की सभी एनर्जी नीड्स को फुल फिल करने के लिए मोस्ट प्रैटिकल एंड एनवायरमेंट फ्रेंडली ऑल्टरनेटिव बनता जा रहा हैं।

और फिर ज्यादातर घरों की अपनी छत होती हैं जहां बोहोत असानी से सोलार पैनल्स को इंस्टॉल किया जा सकता है।

सोलार पैनल्स सोलार एनर्जी को कैसे प्रोड्यूस करते हैं

सोलार एनर्जी के इतने सारे बेनिफिट जान लेने के बाद अब क्यों ना ये जान लिया जाए के आई सोलार पैनल्स सोलार एनर्जी को कैसे प्रोड्यूस करते हैं।

और कैसे वो एनर्जी हमारे घर या ऑफिस में इलेक्ट्रिक सिटी की तरह यूज हो पाती हैं, सोलार पैनल्स दिखने में इतने सिंपल लगते है लेकिन सनलाईट को एनर्जी में कन्वर्ट करने का इतना बड़ा काम ये पैनल्स करते कैसे है ये वाकई में इनफॉर्मेटिव रहने वाला है।

और इसलिए आए इसके बारे में जानते हैं सोलार पैनल्स मैटेरियल की कई सारे लेयर्स की बने हुए होते हैं इन लेयर्स में से टॉप क्लास लेयर सोलार सेल्स को प्रोटेक्ट करती हैं।

इसकी स्मॉलर यूनिट सोलार सेल्स होती है जिन्हे पोटो वोल्टिक सेल्स भी कहा जाता हैं।

हर सोलार एकदूसरे से इंटरकनेक्टेड रहती है ताकि सोलार पैनल बनाया जा सके सोलार सेल्स में सेमीकंडक्टर सिलिकन की दो लेयर्स होती हैं जिनमे से एक लेयर पॉजिटिवली चार्ज होती है और दूसरी नेगेटिवली चार्ज होती है।

जो इलेक्ट्रिक फील्ड बनाती हैं टीई सेल्स डेलाईट में सनलाईट को एब्जॉर्ब करती है और जब सनलाईट एक पोटो वोल्टिक सोलार सेल्स पर पड़ती है तो सेल्स एनर्जीज हो जाती है।

और इस प्रोसेस में एटम्स से एल्क्ट्रॉन सेप्रेट होकर सोलार सेल्स के चारों ओर घूमने लगते हैं एस मूमेंट से इलेक्ट्रिकल करंट क्रिएट होता है जो इलेक्ट्रिक सिटी जेनरेट करता हैं।

सोलार पैनल्स सोलार एनर्जी DC से AC में कैसे कन्वर्ट होता है।

लेकिन इसके बाद प्रोसेस पूरा नही होता जाता क्योंकि सनलाईट से जो इलेक्ट्रिक सिटी बनी वो डीसी यानी डायरेक्ट करंट इलेक्ट्रिक सिटी होती है जो घरों में यूज होने वाला इलेक्ट्रिक सिटी टाईप नहीं होता है।

और यह तो आप भी जानते होंगे कि घरों में यूज होने वाली इलेक्ट्रिक सिटी एसी यानी ऑल्टरनेटिव करंट होता है, और अच्छी बात यह है कि डीसी इलेक्ट्रिक सिटी को इंवॉल्टर के जरिए एसी इलेक्ट्रिक सिटी में चेंज किया जा सकता हैं।

और मॉडर्न सोलार सिस्टम में ऐसे इंवॉल्टर्स मौजूद होते है और एक बार डीसी को एसी में कन्वर्ट किया जाता है तब ये इलेक्ट्रिक पैनल के थ्रू रन करती हैं और घर में इलेक्ट्रिक सिटी फ्लो को पॉसिबल बनाती हैं।

जिसेसे आप जो चाहे वो चला सकते हैं यानी बल्ब से लेकर एप्लायंसेस तब सबकुछ बड़े आराम से यूज कर सकते हैं और ये बिल्कुल वैसे ही काम करती है जैसे नॉर्मली इलेक्ट्रिक सिटी किया करती हैं।

एस तरह सोलार पैनल लगाकर सोलार एनर्जी का यूज करके अपने घर को रोशन किया जा सकता हैं।और जैसा हमने जाना कि सोलार एनर्जी के बोहोत सारे बेनिफिट्स होते हैं वही इसके कुछ डीसअड़वांटेज भी देखे जा सकते है।

 

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Tesla Solar Panels

सोलार एनर्जी के Disadvantage

जैसे कि पैनल्स ज्यादा इलेक्ट्रिक सिटी तभी जेनरेट कर पाते है जब सूरज चमक रहा हो लेकिन जब बादल हो तब पैनल्स उतना अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाते।

और जहा तक होम सोलार पॉवर प्लांट्स की कॉस्ट की बात है तो टाईम के साथ जिस तरीके से इस एरिया में एडवांसमेंट और यूज बडा है उसके चलते सोलार प्लांट्स की कोस्टिंग काफी कम हुई हैं।

लेकिन फिर भी इन्हे इंस्टॉल करने से पहले एक बार सोचने की जरूरत तो पड़ती ही हैं और यह भी कह सकते है कि फिलाल ये हर किसी से पोंच में नही आ पाए।

सोलार सिस्टम की साइज रिक्वायरमेंट के अकॉर्डिंग से चूज की जाती हैं और उसके अकॉर्डिंग इसकी कॉस्ट होती हैं जो की इसके टाईप पर भी डिपेंड करती हैं।

ऑफ ग्रीड और ग्रीड करेक्टेड सोलार एनर्जी

वेए प्लांट्स दो टाइप्स के होते है ऑफ ग्रीड और ग्रीड करेक्टेड, ऑफ ग्रीड सिस्टम मैन ग्रीड से कनेक्टेड नहीं होता है और ऐसे सिस्टम में सोलार एनर्जी बैटरीज में स्टोर रहती हैं।

जैसे इंवॉल्टर्स के जरिए डीसी से एसी में कन्वर्ट किया जाता हैं इस सिस्टम को रेगुलर मेंटेनेस की जरूरत पड़ती हैं।

और ये कॉस्टली भी होता हैं ग्रीड कनेक्टेड सिस्टम बैटरीज यूज नहीं करता है बल्कि इसमें एक इंवोल्टर और एक नेटमीटर होता है।

इसे यूज करने वाले होम ऑनर्स को पॉवर प्लांट्स का साइज कैलकुलेट करने की ज्यादा फिक्र भी नहीं करनी पड़ती।

क्योंकि जितनी भी एक्स्ट्रा पॉवर जेनरेट होती है उसे इलेक्ट्रिक सिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी को सेल किया जा सकता हैं और अगर कोई शॉर्टेज हो तो उसे ग्रीड सप्लाय से पूरा कर दिया जाता हैं।

लेकिन जिन घरों में रेगुलर पॉवर कट हुवा करता है उनके के लिए ये सिस्टम अच्छा ऑप्शन नहीं हैं क्योंकि अगर सिस्टम इलेक्ट्रिक सिटी जेनरेट तो करे लेकिन ग्रीड फेल हो जाए तो वो इलेक्ट्रिक सिटी वेस्ट जो जाएगी।

एक टिपिकल वन किलो वोल्ड ऑफ ग्रीड सिस्टम कॉस्ट सत्तर हजार से सव्वा लाख रुपए तक हो सकती हैं।

वही ग्रीड कनेक्टेड सिस्टम की कॉस्ट पच्चत्तर हजार से नब्बे हजार रुपए तक हो सकती हैं।

तो दोस्तो इस तरह आप अब ये भी जान चुके होंगे कि सोलार एनर्जी हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं।

और अब तो सोलार पैनल के जरिए जिस तरह ये सोलार एनर्जी हमारे इलेक्ट्रिक सिटी को रिक्वायरमेंट को फुलफिल करने में मदद गार साबिद हो रही हैं वो भी एनवायरमेंट को नुकसान पोचाएं बिना।

उससे यह तो समझ में आता है कि इंडिया में बोहोत जल्दी ही सोलार एनर्जी का मैक्सिमम बेनिफिट लिया जा सकेगा और जो सोलार पैनल्स हमारे नेबर के छतो पर लगा हुवा है वो बोहोत जल्दी ही हमारे छत पर भी लग ही जाएगा।

Conclusion

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