Warren Buffett Investment Strategy

डू यू नो इस दुनिया का फास्ट बिलिओनैर कौन है इट्स जे वॉकर इन्होंने सन् 2000 की शुरुआत में प्राइस लाइन डॉट कॉम नाम की एक डिस्काउंट ऑफर वेबसाइट को लॉन्च किया और इस लॉन्च के सिर्फ 1 साल के अंदर ही इनकी नेट वर्थ 1.8 बिलियन डॉलर तक पहुँच गयी बट अगर वही हम वर्ल्ड ग्रेटेस्ट इन्वेस्टर वॉरन बफेट की बात करें तो उन्हें अपने पहले बिलियन डॉलर एरन करने में 55 साल लग गए थे। Warren Buffett Investment Strategy | Warren Buffett Investing Tips in hindi

अब समझने की बात यह है कि भले ही जे वॉकर सिर्फ 1 साल के अंदर मिलियनर जरूर बन गए लेकिन उनकी वेल्थ सस्टेनेबल नहीं थी।

एक ना एक दिन प्राइस लाइन डॉट कॉम बबल बर्स्ट होना ही था और जब वो बस हुआ दुबई ओपन ऑक्टोबर 2000 कुछ ही महीनों में उनके बिलियन डॉलर्स सिर्फ 333 मिलियन ही रह गए लेकिन वॉरेन बफेट पहले भी दुनिया के टॉप 1% रिचेस्ट क्लब में शामिल थे आज भी है और आने वाले कई सालों तक वो टॉप 1% वे रिचेस्ट लोगों की लिस्ट में ही रहेंगे।

पता है क्यों, क्योंकि एक चीज़ है जिसकी वजह से वॉरेन बफेट दुनिया के बाकी अरबपति के मुकाबले थोड़े अलग है देखो 2021 के अंत तक पूरी दुनिया में 2755 अरबपति थे और इन सभी की नेटवर्क को कंबाइन कर दिया जाए तो बनते हैं 13.1 ट्रिलियन डॉलर्स और इतना सारा पैसा कमाने वाले इन मेजोरिटी अरबपति की अगर हम बात करें तो ये लोग अपने किसी टेक स्टार्टअप आइडिया या किसी कन्वेंशनल बिज़नेस की वजह से ही आज एक अरबपति बन पाए।

इन अरबपति को लोग इन्नोवेटर आन्ट्रप्रनर और बिजनेसमैन के तौर पर जानते हैं बट वारेन बफ़ेट को लोग याज अ इन्वेस्टर जानते हैं इसका मतलब यह है कि वॉरेन बफेट अपनी इन्वेस्टमेंट फिलॉस्फी की वजह से अरबपति बने किसी फैन्सी बिज़नेस आइडिया पे काम करके नहीं बट आखिर इनकी ये इन्वेस्टमेंट फिलॉस्फी है क्या और हम इनकी इस इन्वेस्टमेंट फिलॉस्फी से क्या सीख सकते हैं।

आज इस लेख में हम इनकी इसी इन्वेस्टमेंट फिलोसोफी के बारे में बात करने वाले हैं, सो अगर आपको भी इन्वेस्टिंग में इंटरेस्ट है तो इस लेख को अन तक जरूर पढ़ना लेट स्टार्ट।

डू यू नो इस दुनिया का फास्ट बिलिओनैर कौन है इट्स जे वॉकर इन्होंने सन् 2000 की शुरुआत में प्राइस लाइन डॉट कॉम नाम की एक डिस्काउंट ऑफर वेबसाइट को लॉन्च किया और इस लॉन्च के सिर्फ 1 साल के अंदर ही इनकी नेट वर्थ 1.8 बिलियन डॉलर तक पहुँच गयी बट अगर वही हम वर्ल्ड ग्रेटेस्ट इन्वेस्टर वॉरन बफेट की बात करें तो उन्हें अपने पहले बिलियन डॉलर एरन करने में 55 साल लग गए थे। अब समझने की बात यह है कि भले ही जे वॉकर सिर्फ 1 साल के अंदर मिलियनर जरूर बन गए लेकिन उनकी वेल्थ सस्टेनेबल नहीं थी। एक ना एक दिन प्राइस लाइन डॉट कॉम बबल बर्स्ट होना ही था और जब वो बस हुआ दुबई ओपन ऑक्टोबर 2000 कुछ ही महीनों में उनके बिलियन डॉलर्स सिर्फ 333 मिलियन ही रह गए लेकिन वॉरेन बफेट पहले भी दुनिया के टॉप 1% रिचेस्ट क्लब में शामिल थे आज भी है और आने वाले कई सालों तक वो टॉप 1% वे रिचेस्ट लोगों की लिस्ट में ही रहेंगे। पता है क्यों, क्योंकि एक चीज़ है जिसकी वजह से वॉरेन बफेट दुनिया के बाकी अरबपति के मुकाबले थोड़े अलग है देखो 2021 के अंत तक पूरी दुनिया में 2755 अरबपति थे और इन सभी की नेटवर्क को कंबाइन कर दिया जाए तो बनते हैं 13.1 ट्रिलियन डॉलर्स और इतना सारा पैसा कमाने वाले इन मेजोरिटी अरबपति की अगर हम बात करें तो ये लोग अपने किसी टेक स्टार्टअप आइडिया या किसी कन्वेंशनल बिज़नेस की वजह से ही आज एक अरबपति बन पाए। इन अरबपति को लोग इन्नोवेटर आन्ट्रप्रनर और बिजनेसमैन के तौर पर जानते हैं बट वारेन बफ़ेट को लोग याज अ इन्वेस्टर जानते हैं इसका मतलब यह है कि वॉरेन बफेट अपनी इन्वेस्टमेंट फिलॉस्फी की वजह से अरबपति बने किसी फैन्सी बिज़नेस आइडिया पे काम करके नहीं बट आखिर इनकी ये इन्वेस्टमेंट फिलॉस्फी है क्या और हम इनकी इस इन्वेस्टमेंट फिलॉस्फी से क्या सीख सकते हैं। आज इस लेख में हम इनकी इसी इन्वेस्टमेंट फिलोसोफी के बारे में बात करने वाले हैं, सो अगर आपको भी इन्वेस्टिंग में इंटरेस्ट है तो इस लेख को अन तक जरूर पढ़ना लेट स्टार्ट। बफ़ेट फिलोसॉफी पॉइंट नंबर वन बफ़ेट फिलोसोफी वॉरेन बफेट अपने गुरु बेंजामिन ग्राहम की वैल्यू इन्वेस्टिंग फिलॉसफी को फॉलो करते बट ऐट लिस्ट इस फिलॉसफी सिंपल भाषा में समझा जाए तो इस फिलॉसोफी के अकॉर्डिंग ये कुछ आउटस्टैंडिंग कंपनी को एक्सेसिबल प्राइस में खरीदने की कोशीश करते हैं और ऐसी कम्पनीज़ को ढूंढना ही इनका असली टैलेंट है। और पता है ये आउटस्टैंडिंग कंपनीस को ढूंढने का सिलसिला उन्होंने बचपन में शुरू कर दिया था, दरअसल इस सिलसिले की शुरुआत हुई सन् 1937 में जब वॉरेन बफेट 7 साल के थे। उस साल गर्मियों के मौसम में इन्होंने एक पैटर्न नोटिस किया उन्होंने देखा कि लोग अक्सर काम के दौरान कुछ देर ब्रेक लेकर कुछ ठंडा पीने जरूर जाते हैं। और ज्यादातर लोग कोल्ड ड्रिंक पीना पसंद करते हैं ये देखते ही इनके दिमाग में एक आइडिया आया की कोल्ड ड्रिंक रीसेल करने का फिर ये ठीक उसी दिन अपने ग्रैंडफादर के ग्रोस्री स्टोर में गए और वहाँ से उन्होंने 25 सेंट देकर छह कोल्डड्रिंक की बोतल खरीदी। फिर उन कोल्डरिंग्स को उन्होंने अपने घर के बाहर काम करने वाले लोगों को जाकर बेचा बट इन्हें ज्यादा प्रॉफिट नहीं हुआ क्योंकि इन्हें ये तो समझ आ गया था कि लोग कोल्ड ड्रिंक पीना पसंद करते हैं । पर इन्हें अभी तक ये नहीं पता चला था कि लोग कौनसे ब्रैंड की कोल्ड ड्रिंक पीना पसंद करते हैं। और बस इसी एक सवाल से शुरू हुई इनकी कंपनी को ऐनालाइज करने की जर्नी पता है उन्होंने क्या किया ये अलग अलग गैस स्टेशन पर गए और उन गैस स्टेशन पे जो कोल्ड ड्रिंक की बॉटल से ढकने होते थे उन्हें कलेक्ट करना शुरू कर दिया। और ये काम उन्होंने कई हफ्तों तक किया और करीबन 8000 अलग अलग कोल्डड्रिंक की बोतल के ढक्कन इकट्ठे कर लिए फिर 1 दिन बैठकर उन्होंने काउंट किया कि कौन सी कंपनी की कोल्ड ड्रिंक सबसे ज्यादा बिकती हैं द ऐन्सर वास् कोका कोला फिर बस उन्होंने बैक तो बैक कई दिनों तक अपने ग्रैंडफादर की दुकान से कोकाकोला की बॉटल्स खरीदी और उन्हें बेचकर खूब प्रॉफिट कमाया इन्शुर्ड कुछ इस तरह इन्होने अपनी लाइफ की पहली प्रॉफिट मेकिंग और एक आउटस्टैंडिंग कंपनी को आइडेंटिफाइ करा। नाउ लेट्स टॉक अबाउट दिस इन्वेस्टमेंट फिलॉस्फी इन कॉन्टेक्ट ऑफ स्टॉक मार्केट अपने इन्वेस्टमेंट फिलॉस्फी के अकॉर्डिंग ये सबसे पहले देखते हैं की बिज़नेस मॉडल के नजरिये से वो कंपनी कितनी अच्छी तरह पैसा कमा सकती है फिर ये देखते हैं कि उस कंपनी पर कर्जा कितना है कितना पैसा ऐसा डेट उस कंपनी ने उठा रखा है उस कंपनी के प्रॉडक्ट या सर्विस का एवरेज मार्जिन कितना है और क्या उस कंपनी का स्टॉक प्राइस एक फेर वैल्यू के नीचे ट्रेड कर रहा है। अगर हाँ तो मतलब शायद लोग उस कंपनी को ठीक से समझ नहीं पा रहे हैं और इस वजह से स्टॉक सस्ते में बिक रहा है, फिर इन सभी चीजों को ऐनालाइज करने के बाद ही वो किसी कम्पनी में इन्वेस्ट करते है। रूल नंबर वन नेवर लूस मनी रूल नंबर टू नेवर फॉरगेट रूल नंबर वन रूल नंबर वन नेवर लूस मनी रूल नंबर टू नेवर फॉरगेट रूल नंबर वन इस रूल को बस एक फैंसी डाइलॉग मत समझना क्योंकि इसके पीछे गहरा लॉजिक है देखो ऐसा नहीं कि वॉरेन बफेट ने अपने इन्वेस्टिंग करियर में कभी पैसा नहीं गंवाया बल्कि 2008 के फाइनैंशल क्राइसिस में उन्हें 23 बिलियन डॉलर का लॉस हुआ था। तो फिर वो ऐसा क्यों कह रहे दैट नेवर लूस योर मानी मी वेल वारेन बफ़ेट ये चीज़ उन लोगों को समझाने की कोशीश कर रहे हैं जो स्टॉक मार्केट को सिर्फ बाईं ओर सेल की नजरिये से देखते है। फॉर एग्ज़ैम्पल मान लो आपने कल स्टॉक मार्केट में ₹1000 इनवेस्ट किए और कुछ टाइम बाद किसी वजह से मार्केट डाउन हो गई ऐंड आपके ₹1000 की वैल्यू घटकर सिर्फ पांचसो रहेंगे अभी सिनेरियो में कुछ लोग घबराकर अपना सारा पैसा बाहर निकालेंगे और फिर किसी अच्छी ओप्पोर्चुनिटी के दौरान वो बचे हुए ₹500 इन्वेस्ट करने की कोशीश करेंगे। बट क्या लगता है आपको ऐसा करने से लॉस आसानी से रिकवर हो सकता है शायद नहीं, और आसानी से तो बिल्कुल नहीं, क्योंकि लॉस्ट अमाउंट था 500 और रिइंवेस्ट अमाउंट भी था 500 अब उस रीइन्वेस्ट अमाउंट पर अगर 50% का रिटर्न मिल जाए ना तो बनते हैं ₹750 जबकि लॉस रिकवर करने के लिए फुल 100% का रिटर्न चाहिए। और इसीलिए कहा जाता है कि स्टॉक मार्केट में पैसा गंवाना तो आसान है पर पैसा कमाना थोड़ा मुश्किल है इसलिए आपको भी पूरी नॉलेज गेन करने के बाद और सोच समझकर ही इन्वेस्ट करना चाहिए। इफ द बिज़नेस डज़ वेल स्टॉक इविन्चवली फोलोस नाउ पॉइंट नंबर थ्री इफ द बिज़नेस डज़ वेल स्टॉक इविन्चवली फोलोस बफ़ेट अपने इन्वेस्टमेंट अप्रोच को कॉमन सेंस इन्वेस्टिंग कहते हैं और इस फिलॉसफी ने उन्हें कई सालों से काफी अच्छे रिटर्न भी दिए। क्योंकि जहाँ बाकी इनवेस्टर्स स्टॉक प्राइस पर फोकस करते है अपना ज्यादातर टाइम यह प्रोड्कट करने में लगाते है की स्टॉक प्राइस किस तरीके से ऊपर या नीचे जाएगा वहीं बफेट स्टॉक प्राइस के बजाय अपना ज्यादा से ज्यादा टाइम उस बिज़नेस को समझने में लगाते है उनका मानना है कि इन्वेस्टर को किसी कंपनी के स्टॉक को सेम उसी तरह देखना चाहिए जैसे बिज़नेस ओनर देखता है। क्योंकि प्रॉफिट तो दोनों ही कमाना चाहते हैं बस फर्क यह है कि बिज़नेस ओनर उस पूरी कंपनी को अपना समझता जबकि एक इन्वेस्टर उस कंपनी के कुछ हिस्से का मालिक होता सो इसलिए वॉरेन बफेट के इस प्रिंसिपल के अकॉर्डिंग एग्ज़ैक्ट्ली जैसे एक बिज़नेस ओनर प्रॉफिट कमाने के लिए कंपनी के बिज़नेस मॉडल ऑपरेशन्स और कंपनी के लॉन्ग टर्म प्लान पर फोकस करता है ठीक वैसे ही एक इन्वेस्टर को भी सिर्फ उस कंपनी के स्टॉक प्राइस के बजाय कंपनी के बिज़नेस मॉडल पर भी फोकस करना चाहिए। और उस बिज़नेस की वैल्यू पर इन्वेस्ट करना चाहिए ना की सिर्फ उसके स्टॉक प्राइस पर। पता है स्टार्टिंग में इस प्रिन्सिपल को अपनी इन्वेस्टिंग में अप्लाई करने का बेस्ट तरीका क्या होता है देखो सिंपल हमेशा उस बिज़नेस पर फोकस करो जिसे बिज़नेस को आप अच्छे से समझ सकते हो और हरेक इंडस्ट्री में इन्वेस्ट करने के बजाय उन इंडस्ट्रीज पर फोकस करो जिसके बारे में आपको नॉलेज हो। और साथ ही साथ इस इंडस्ट्री में आपको डीसेंट वैल्यू पर अच्छे रिटर्न्स मिल पाए ऐलिस रिमेम्बर, आप एक स्टॉक नहीं खरीदे बल्कि आप एक बिज़नेस खरीद रहे हो। अमेरिकन एक्सप्रेस जो कि यूएसए की मोस्ट वेल नोन क्रेडिट कार्ड कंपनी है ये 1963 में ये एक स्यालेड ऑइल स्कैंडल में फंस गई थी, जिसकी वजह से उस कंपनी के स्टॉक प्राइस बहुत ज्यादा कम हो गए थे। और वो डेट में भी आ गई थी वो वारेन बफ़ेट बहुत टाइम से इस कंपनी के बारे में रिसर्च कर रहे थे एंड उनकी रिसर्च के अकॉर्डिंग इस कंपनी के फंडामेंटल्स बहुत स्ट्रॉन्ग थे ऐंड कंपनी का बिज़नेस मॉडल भी बहुत सॉलिड था और कंपनी के पास रिकॉर्ड भी बहुत क्लिअर थे। ऐंड अपनी इस रिसर्च की वजह से उन्हें विश्वास हो गया था की ये एक अच्छी प्रॉफिटेबल कंपनी है बट जैसे ही ये स्कैंडल हुआ, मार्केट में अमेरिकन एक्सप्रेस की रेप्यूटेशन थोड़ी डाउन हो गयी और इसी टाइम पे वॉरेन बफेट को एक ग्रेट ओप्पोर्चुनिटी दिखाई दी उन्हें विश्वास था कि यह सिर्फ एक टेंपररी लॉस है जो मार्केट के सेंटीमेंट की वजह से हुआ है। जिसकी वजह से ये कंपनी बहुत ज्यादा डिस्काउंटेड प्राइस पर मिल रही है मौका मिलते हैं वॉरेन बफेट ने उस टोटल कंपनी के 5% हिस्से को सिर्फ 20 मिलियन डॉलर में खरीद लिया। अंदाज वॉरेन बफेट अपनी कंपनी बर्कशायर हैथवे के जरिए अमेरिकन एक्सप्रेस के टोटल 19.57% शेयर होल्ड करते है जिसकी वैल्यू अराउंड 24.9 बिलियन डॉलर्स है। अब यहाँ सीखने की बात यह है कि किसी भी कंपनी के स्टॉक्स को खरीदते वक्त आपको पहले एक वंडरफुल बिज़नेस को आइडेंटिफाइ करना चाहिए अपनी रिसर्च पूरी करनी चाहिए और फिर सबसे इम्पोर्टेन्ट पॉइंट एक फेर प्राइस का इंतजार करना चाहिए जिसपे फेर प्राइस पर आप फाइनली उस कंपनी के स्टॉक्स को खरीद ले। आवर फेवरेट होल्डिंग पीरियड इस फोरेवर नाउ पॉइंट नंबर फोर आवर फेवरेट होल्डिंग पीरियड इस फोरेवर बट वारेन बफेट ने एक बार कुछ ऐसा कहा था मेरी ये मिस्टेक फाइनैंशल डिजास्टर के हिसाब से गिनीज बुक में एक स्पॉट डिज़र्व करती है बट वो मिस्टेक थी क्या, देखो 2014 में उन्होंने डिस्टन्स टू नाम की एक कंपनी को खरीदने के लिए 433 मिलियन डॉलर्स पे करे थे पर इस अमाउंट पे करने के लिए उन्होंने कैश का नहीं बल्कि अपने पक्ष है पेशेंट्स का यूज़ करा था और जब वो अपने शेयर होल्डर्स को लेटर लिखकर इस इंसिडेंट के बारे में बता रहे थे तो उन्होंने रिवील करा की उस टाइम बशीरहाट में कई शेड्स की वैल्यू 5.7 बिलियन डॉलर्स थी। समझा मिस्टेक क्या थी ऐक्चुअली वो शेर की फ्यूचर वैल्यू के बारे में बात कर रहे थे वो ये बताना चाह रहे थे कि आपके फाइनैंशल डिसीजन आज भले आपको नोर्मल लगे बट लॉन्ग टर्म में एक गलत डिसीज़न आपको भारी नुकसान करा सकता है। अब मैं जानता हूँ कि आप मिलियन डॉलर कंपनी को बिल नहीं कर रहे हैं बट वारेन बफ़ेट की इस मिस्टेक से आप ये सीख सकते हो की आपकी आज की इन्वेस्टमेंट फ्यूचर में बहुत ही ज्यादा वैल्यू होल्ड करती है, हो सकता है अभी आपको उसका अंदाजा ना हो, हो सकता है आपका मन करें कि आप अपनी इन्वेस्टमेंट को तोड़कर कुछ बाई कर लो या उसे कहीं और यूज़ कर लो पर ट्रस्ट अभी जीस भी चीज़ के लिए आप अपनी इन्वेस्टमेंट ब्रेक करने का सोच रहे हो आप फ्यूचर में जाकर बहुत रिग्रेट करने वाले हो अगर आपको कोई ऐबसल्यूट इमर्जेंसी नहीं है तो आपको किसी भी हालत में अपने इन्वेस्टमेंट ब्रेक नहीं करनी चाहिए। इन फैक्ट आपको ये भी पता होना चाहिए कि वॉरेन बफेट की आज की टोटल वेल्थ मतलब 114 बिलियन डॉलर्स से उन्होंने 81 बिलियन डॉलर्स अपने 60 ऑफ बर्थ डे के बाद कमाए थे। इन्फैक्ट अगर आप वॉरेन बफेट की सक्सेस को सिर्फ उनके आइक्यू और एफर्ट से जज करते हो तो आप गलत कर रहे हो क्योंकि आपको इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए की वो इंसान आदि सेंचुरी से भी ज्यादा समय से इन्वेस्टिंग कर रहे है तो दोस्तों इसी के साथ ये लेख समाप्त होता है अगर आप को यह लेख पसंद आता है तो आप हमें कमेंट करके बता सकते हो धन्यवाद।

 

बफ़ेट फिलोसॉफी

पॉइंट नंबर वन बफ़ेट फिलोसोफी वॉरेन बफेट अपने गुरु बेंजामिन ग्राहम की वैल्यू इन्वेस्टिंग फिलॉसफी को फॉलो करते बट ऐट लिस्ट इस फिलॉसफी सिंपल भाषा में समझा जाए तो इस फिलॉसोफी के अकॉर्डिंग ये कुछ आउटस्टैंडिंग कंपनी को एक्सेसिबल प्राइस में खरीदने की कोशीश करते हैं और ऐसी कम्पनीज़ को ढूंढना ही इनका असली टैलेंट है।

और पता है ये आउटस्टैंडिंग कंपनीस को ढूंढने का सिलसिला उन्होंने बचपन में शुरू कर दिया था, दरअसल इस सिलसिले की शुरुआत हुई सन् 1937 में जब वॉरेन बफेट 7 साल के थे।

उस साल गर्मियों के मौसम में इन्होंने एक पैटर्न नोटिस किया उन्होंने देखा कि लोग अक्सर काम के दौरान कुछ देर ब्रेक लेकर कुछ ठंडा पीने जरूर जाते हैं।

और ज्यादातर लोग कोल्ड ड्रिंक पीना पसंद करते हैं ये देखते ही इनके दिमाग में एक आइडिया आया की कोल्ड ड्रिंक रीसेल करने का फिर ये ठीक उसी दिन अपने ग्रैंडफादर के ग्रोस्री स्टोर में गए और वहाँ से उन्होंने 25 सेंट देकर छह कोल्डड्रिंक की बोतल खरीदी।

फिर उन कोल्डरिंग्स को उन्होंने अपने घर के बाहर काम करने वाले लोगों को जाकर बेचा बट इन्हें ज्यादा प्रॉफिट नहीं हुआ क्योंकि इन्हें ये तो समझ आ गया था कि लोग कोल्ड ड्रिंक पीना पसंद करते हैं । पर इन्हें अभी तक ये नहीं पता चला था कि लोग कौनसे ब्रैंड की कोल्ड ड्रिंक पीना पसंद करते हैं।

और बस इसी एक सवाल से शुरू हुई इनकी कंपनी को ऐनालाइज करने की जर्नी पता है उन्होंने क्या किया ये अलग अलग गैस स्टेशन पर गए और उन गैस स्टेशन पे जो कोल्ड ड्रिंक की बॉटल से ढकने होते थे उन्हें कलेक्ट करना शुरू कर दिया।

और ये काम उन्होंने कई हफ्तों तक किया और करीबन 8000 अलग अलग कोल्डड्रिंक की बोतल के ढक्कन इकट्ठे कर लिए फिर 1 दिन बैठकर उन्होंने काउंट किया कि कौन सी कंपनी की कोल्ड ड्रिंक सबसे ज्यादा बिकती हैं द ऐन्सर वास् कोका कोला फिर बस उन्होंने बैक तो बैक कई दिनों तक अपने ग्रैंडफादर की दुकान से कोकाकोला की बॉटल्स खरीदी और उन्हें बेचकर खूब प्रॉफिट कमाया इन्शुर्ड कुछ इस तरह इन्होने अपनी लाइफ की पहली प्रॉफिट मेकिंग और एक आउटस्टैंडिंग कंपनी को आइडेंटिफाइ करा।

नाउ लेट्स टॉक अबाउट दिस इन्वेस्टमेंट फिलॉस्फी इन कॉन्टेक्ट ऑफ स्टॉक मार्केट अपने इन्वेस्टमेंट फिलॉस्फी के अकॉर्डिंग ये सबसे पहले देखते हैं की बिज़नेस मॉडल के नजरिये से वो कंपनी कितनी अच्छी तरह पैसा कमा सकती है फिर ये देखते हैं कि उस कंपनी पर कर्जा कितना है कितना पैसा ऐसा डेट उस कंपनी ने उठा रखा है उस कंपनी के प्रॉडक्ट या सर्विस का एवरेज मार्जिन कितना है और क्या उस कंपनी का स्टॉक प्राइस एक फेर वैल्यू के नीचे ट्रेड कर रहा है।

अगर हाँ तो मतलब शायद लोग उस कंपनी को ठीक से समझ नहीं पा रहे हैं और इस वजह से स्टॉक सस्ते में बिक रहा है, फिर इन सभी चीजों को ऐनालाइज करने के बाद ही वो किसी कम्पनी में इन्वेस्ट करते है।

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रूल नंबर वन नेवर लूस मनी रूल नंबर टू नेवर फॉरगेट रूल नंबर वन

रूल नंबर वन नेवर लूस मनी रूल नंबर टू नेवर फॉरगेट रूल नंबर वन इस रूल को बस एक फैंसी डाइलॉग मत समझना क्योंकि इसके पीछे गहरा लॉजिक है देखो ऐसा नहीं कि वॉरेन बफेट ने अपने इन्वेस्टिंग करियर में कभी पैसा नहीं गंवाया बल्कि 2008 के फाइनैंशल क्राइसिस में उन्हें 23 बिलियन डॉलर का लॉस हुआ था।

तो फिर वो ऐसा क्यों कह रहे दैट नेवर लूस योर मानी मी वेल वारेन बफ़ेट ये चीज़ उन लोगों को समझाने की कोशीश कर रहे हैं जो स्टॉक मार्केट को सिर्फ बाईं ओर सेल की नजरिये से देखते है।

फॉर एग्ज़ैम्पल मान लो आपने कल स्टॉक मार्केट में ₹1000 इनवेस्ट किए और कुछ टाइम बाद किसी वजह से मार्केट डाउन हो गई ऐंड आपके ₹1000 की वैल्यू घटकर सिर्फ पांचसो रहेंगे अभी सिनेरियो में कुछ लोग घबराकर अपना सारा पैसा बाहर निकालेंगे और फिर किसी अच्छी ओप्पोर्चुनिटी के दौरान वो बचे हुए ₹500 इन्वेस्ट करने की कोशीश करेंगे।

बट क्या लगता है आपको ऐसा करने से लॉस आसानी से रिकवर हो सकता है शायद नहीं, और आसानी से तो बिल्कुल नहीं, क्योंकि लॉस्ट अमाउंट था 500 और रिइंवेस्ट अमाउंट भी था 500 अब उस रीइन्वेस्ट अमाउंट पर अगर 50% का रिटर्न मिल जाए ना तो बनते हैं ₹750 जबकि लॉस रिकवर करने के लिए फुल 100% का रिटर्न चाहिए।

और इसीलिए कहा जाता है कि स्टॉक मार्केट में पैसा गंवाना तो आसान है पर पैसा कमाना थोड़ा मुश्किल है इसलिए आपको भी पूरी नॉलेज गेन करने के बाद और सोच समझकर ही इन्वेस्ट करना चाहिए।

इफ द बिज़नेस डज़ वेल स्टॉक इविन्चवली फोलोस

नाउ पॉइंट नंबर थ्री इफ द बिज़नेस डज़ वेल स्टॉक इविन्चवली फोलोस बफ़ेट अपने इन्वेस्टमेंट अप्रोच को कॉमन सेंस इन्वेस्टिंग कहते हैं और इस फिलॉसफी ने उन्हें कई सालों से काफी अच्छे रिटर्न भी दिए।

क्योंकि जहाँ बाकी इनवेस्टर्स स्टॉक प्राइस पर फोकस करते है अपना ज्यादातर टाइम यह प्रोड्कट करने में लगाते है की स्टॉक प्राइस किस तरीके से ऊपर या नीचे जाएगा वहीं बफेट स्टॉक प्राइस के बजाय अपना ज्यादा से ज्यादा टाइम उस बिज़नेस को समझने में लगाते है उनका मानना है कि इन्वेस्टर को किसी कंपनी के स्टॉक को सेम उसी तरह देखना चाहिए जैसे बिज़नेस ओनर देखता है।

क्योंकि प्रॉफिट तो दोनों ही कमाना चाहते हैं बस फर्क यह है कि बिज़नेस ओनर उस पूरी कंपनी को अपना समझता जबकि एक इन्वेस्टर उस कंपनी के कुछ हिस्से का मालिक होता सो इसलिए वॉरेन बफेट के इस प्रिंसिपल के अकॉर्डिंग एग्ज़ैक्ट्ली जैसे एक बिज़नेस ओनर प्रॉफिट कमाने के लिए कंपनी के बिज़नेस मॉडल ऑपरेशन्स और कंपनी के लॉन्ग टर्म प्लान पर फोकस करता है ठीक वैसे ही एक इन्वेस्टर को भी सिर्फ उस कंपनी के स्टॉक प्राइस के बजाय कंपनी के बिज़नेस मॉडल पर भी फोकस करना चाहिए।

और उस बिज़नेस की वैल्यू पर इन्वेस्ट करना चाहिए ना की सिर्फ उसके स्टॉक प्राइस पर।

पता है स्टार्टिंग में इस प्रिन्सिपल को अपनी इन्वेस्टिंग में अप्लाई करने का बेस्ट तरीका क्या होता है देखो सिंपल हमेशा उस बिज़नेस पर फोकस करो जिसे बिज़नेस को आप अच्छे से समझ सकते हो और हरेक इंडस्ट्री में इन्वेस्ट करने के बजाय उन इंडस्ट्रीज पर फोकस करो जिसके बारे में आपको नॉलेज हो।

और साथ ही साथ इस इंडस्ट्री में आपको डीसेंट वैल्यू पर अच्छे रिटर्न्स मिल पाए ऐलिस रिमेम्बर, आप एक स्टॉक नहीं खरीदे बल्कि आप एक बिज़नेस खरीद रहे हो।

अमेरिकन एक्सप्रेस जो कि यूएसए की मोस्ट वेल नोन क्रेडिट कार्ड कंपनी है ये 1963 में ये एक स्यालेड ऑइल स्कैंडल में फंस गई थी, जिसकी वजह से उस कंपनी के स्टॉक प्राइस बहुत ज्यादा कम हो गए थे।

और वो डेट में भी आ गई थी वो वारेन बफ़ेट बहुत टाइम से इस कंपनी के बारे में रिसर्च कर रहे थे एंड उनकी रिसर्च के अकॉर्डिंग इस कंपनी के फंडामेंटल्स बहुत स्ट्रॉन्ग थे ऐंड कंपनी का बिज़नेस मॉडल भी बहुत सॉलिड था और कंपनी के पास रिकॉर्ड भी बहुत क्लिअर थे।

ऐंड अपनी इस रिसर्च की वजह से उन्हें विश्वास हो गया था की ये एक अच्छी प्रॉफिटेबल कंपनी है बट जैसे ही ये स्कैंडल हुआ, मार्केट में अमेरिकन एक्सप्रेस की रेप्यूटेशन थोड़ी डाउन हो गयी और इसी टाइम पे वॉरेन बफेट को एक ग्रेट ओप्पोर्चुनिटी दिखाई दी उन्हें विश्वास था कि यह सिर्फ एक टेंपररी लॉस है जो मार्केट के सेंटीमेंट की वजह से हुआ है।

जिसकी वजह से ये कंपनी बहुत ज्यादा डिस्काउंटेड प्राइस पर मिल रही है मौका मिलते हैं वॉरेन बफेट ने उस टोटल कंपनी के 5% हिस्से को सिर्फ 20 मिलियन डॉलर में खरीद लिया। अंदाज वॉरेन बफेट अपनी कंपनी बर्कशायर हैथवे के जरिए अमेरिकन एक्सप्रेस के टोटल 19.57% शेयर होल्ड करते है जिसकी वैल्यू अराउंड 24.9 बिलियन डॉलर्स है।

अब यहाँ सीखने की बात यह है कि किसी भी कंपनी के स्टॉक्स को खरीदते वक्त आपको पहले एक वंडरफुल बिज़नेस को आइडेंटिफाइ करना चाहिए अपनी रिसर्च पूरी करनी चाहिए और फिर सबसे इम्पोर्टेन्ट पॉइंट एक फेर प्राइस का इंतजार करना चाहिए जिसपे फेर प्राइस पर आप फाइनली उस कंपनी के स्टॉक्स को खरीद ले।

आवर फेवरेट होल्डिंग पीरियड इस फोरेवर

नाउ पॉइंट नंबर फोर आवर फेवरेट होल्डिंग पीरियड इस फोरेवर बट वारेन बफेट ने एक बार कुछ ऐसा कहा था मेरी ये मिस्टेक फाइनैंशल डिजास्टर के हिसाब से गिनीज बुक में एक स्पॉट डिज़र्व करती है बट वो मिस्टेक थी क्या,

देखो 2014 में उन्होंने डिस्टन्स टू नाम की एक कंपनी को खरीदने के लिए 433 मिलियन डॉलर्स पे करे थे पर इस अमाउंट पे करने के लिए उन्होंने कैश का नहीं बल्कि अपने पक्ष है पेशेंट्स का यूज़ करा था और जब वो अपने शेयर होल्डर्स को लेटर लिखकर इस इंसिडेंट के बारे में बता रहे थे तो उन्होंने रिवील करा की उस टाइम बशीरहाट में कई शेड्स की वैल्यू 5.7 बिलियन डॉलर्स थी।

समझा मिस्टेक क्या थी ऐक्चुअली वो शेर की फ्यूचर वैल्यू के बारे में बात कर रहे थे वो ये बताना चाह रहे थे कि आपके फाइनैंशल डिसीजन आज भले आपको नोर्मल लगे बट लॉन्ग टर्म में एक गलत डिसीज़न आपको भारी नुकसान करा सकता है।

अब मैं जानता हूँ कि आप मिलियन डॉलर कंपनी को बिल नहीं कर रहे हैं बट वारेन बफ़ेट की इस मिस्टेक से आप ये सीख सकते हो की आपकी आज की इन्वेस्टमेंट फ्यूचर में बहुत ही ज्यादा वैल्यू होल्ड करती है,

हो सकता है अभी आपको उसका अंदाजा ना हो, हो सकता है आपका मन करें कि आप अपनी इन्वेस्टमेंट को तोड़कर कुछ बाई कर लो या उसे कहीं और यूज़ कर लो पर ट्रस्ट अभी जीस भी चीज़ के लिए आप अपनी इन्वेस्टमेंट ब्रेक करने का सोच रहे हो आप फ्यूचर में जाकर बहुत रिग्रेट करने वाले हो अगर आपको कोई ऐबसल्यूट इमर्जेंसी नहीं है तो आपको किसी भी हालत में अपने इन्वेस्टमेंट ब्रेक नहीं करनी चाहिए।

इन फैक्ट आपको ये भी पता होना चाहिए कि वॉरेन बफेट की आज की टोटल वेल्थ मतलब 114 बिलियन डॉलर्स से उन्होंने 81 बिलियन डॉलर्स अपने 60 ऑफ बर्थ डे के बाद कमाए थे।

इन्फैक्ट अगर आप वॉरेन बफेट की सक्सेस को सिर्फ उनके आइक्यू और एफर्ट से जज करते हो तो आप गलत कर रहे हो क्योंकि आपको इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए की वो इंसान आदि सेंचुरी से भी ज्यादा समय से इन्वेस्टिंग कर रहे है तो दोस्तों इसी के साथ ये लेख समाप्त होता है अगर आप को यह लेख Warren Buffett Investment Strategy | Warren Buffett Investing Tips in hindi पसंद आता है तो आप हमें कमेंट करके बता सकते हो धन्यवाद।

नमस्ते दोस्तों मेरा नाम Akash Sawdekar है the24hindi.com का Author हु। दोस्तों मुझे Internet पर जानकारी पढ़ना बोहत पसंद है, अगर आपको भी मेरी तरा जानकारी पढ़ना अच्या लगता है तो आप इस Site को Subscribe कर सकते हो धन्यवाद।

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