Inflation Explained in Hindi | Inflation meaning in hindi

मेरे दादा जी ने आज से 40 साल पहले ₹ 35,000 देकर एक घर खरीदा था और 2 दिन पहले ही मैंने भी ₹ 35,000 खर्चे पर मैं उन 35,000 में सिर्फ उस घर के लिए ऐसी खरीद पाया। Inflation Explained in Hindi | Inflation meaning in hindi

मतलब एक जमाने में ₹ 35,000 की वैल्यू एक घर के बराबर हुआ करती थी पर आज उन ₹ 35,000 की वैल्यू घटकर सिर्फ एक एसी के बराबर ही रह चुकी हैं और इसे ही महंगाई मतलब इन्फ्लेशन कहते हैं।

परचेज़िंग पावर (purchasing power)

Inflation Explained in Hindi | Inflation meaning in hindi

पर आखिर ये हुआ क्यों इसे ठीक से समझने के लिए आपको परचेज़िंग पावर के कॉन्सेप्ट को समझना होगा। हर करेंसी के परचेजिंग पावर होती है जिसका अंदाजा इस बात से लगाया जाता है कि उस करेन्सी के ₹   1 से कितनी चीजें खरीदी जा सकती है।
फॉर एग्ज़ैम्पल आज से साठ सत्तर (60,70) साल पहले कई लोगों की मंथ्ली (Monthly) सैलरी चार या ₹5 हुआ करती थी मतलब उस जमाने में इंडियन करेंसी के ₹  1 की परचेसिंग पावर इतनी ज्यादा होती थी कि लोग चाररूपाये (₹  4) में अपनी पूरी फैमिली के एक महीने का खर्चा निकाल लेते थे।

पर आज एकरूपये (₹  1) की परचेसिंग पावर इतनी घट गई है कि अब पंचरूपये (₹  5) खर्च कर मुश्किल से सिर्फ एक बिस्किट का पैकेट खरीद सकते हो, जिससे किसी के घर का खर्चा तो दूर किसी बच्चे का पेट भी ना भरें और इन्फ्लेशन की रील डेफिनेशन यही है की डिक्लाइन पर्चेसिंग पावर ऑफ गिवेन करन्सी ओवरटाइम इस कॉल्ड इन्फ्लेशन।

महंगाई किन चीजों की वजह से होती है ( demand pull inflation)

Inflation Explained in Hindi | Inflation meaning in hindi

पर इन्फ्लेशन होता क्यों है? क्यों हर साल चीजें महंगी हो जाती है? तो चलो अब समझते हैं कि इन्फ्लेशन मतलब महंगाई किन चीजों की वजह से होती है? पर इससे पहले मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूँ कि आप किसी भी ऐसी चीज़ के बारे में मुझे बता सकते हो जिसका रेट पिछले 10 साल में बिल्कुल भी न बड़ा मतलब जीस चीज़ पर महंगाई का बिलकुल भी कोई असर पड़ा ही नहीं। अपनी आन्सर्स मुझे कमेंट सेक्शन में जरूर बताना।

चलो अब बात करते हैं महंगाई मतलब इन्फ्लेशन के रीजन्स के बारे में, और इन्फ्लेशन का सबसे पहले रीज़न है इकोनॉमिक ग्रोथ जब किसी देश की इकॉनमी बहुत अच्छी तरह ग्रो कर रही होती है तो उस देश के लोगों की कमाई भी बढ़ जाती है।

वेट इसे थोड़ा ध्यान से समझना, देखो जब इकॉनमी ग्रोथ करती है तो उस वजह से इकॉनमी के लोगों के बिज़नेस और जॉब भी इकॉनमी के साथ साथ ग्रो करते है मतलब लोगों की सैलरी और बिज़नेस की कमाई पहले से बढ़ जाती है, जिसकी वजह से लोगों के पास चीजें खरीदने और खर्च करने के लिए ज्यादा पैसे होते हैं और जब बहुत सारे लोगों के पास ज्यादा पैसे होते हैं तो मार्केट में एक ही चीज़ को खरीदने वाले कई लोग मौजूद होते हैं।

जीस वजह से चीज़ मतलब प्रोडक्शन सर्विसेज की डिमांड बढ़ जाती है और इस टाइप की इन्फ्लेशन को डिमांड पुल इन्फ्लेशन कहते है।

चलो इसे अब एग्ज़ैम्पल से समझते है, मान लो किसी कार मैन्युफैक्चरर ने एक लग्जरी कार लॉन्च करी और लॉन्च के समय उस कार की कीमत ₹20,00,000 रखी गई थी क्योंकि उस टाइम ₹20,00,000 ही लोगों के लिए बहुत ज्यादा अमाउंट थी और सिर्फ कुछ लोग ये कार अफोर्ड कर पाते थे।

पर फिर कुछ साल बाद इकोनॉमी में ग्रोथ हुई और लोगों की कमाई बढ़ गयी अब जहाँ सिर्फ पहले 100 में से सिर्फ दो लोग ही उस कार को अफोर्ड कर पाते थे, अब 100 में से 20 लोग उस कार को अफोर्ड करने लायक हो गए और इस वजह से मार्केट में उस कार की डिमांड भी बढ़ गई और इस बढ़ी हुई डिमांड की वजह से फाइनली फिर कार मैन्युफैक्चरर ने भी डिमांड को देखते हुए उस कार की कीमत बढ़ा दी।

कॉस्ट पुश इन्फ्लेशन (cost push inflation)

Inflation Explained in Hindi | Inflation meaning in hindi

तो इसे ही डिमांड पुल इन्फ्लेशन कहेंगे अब बात करते हैं इन्फ्लेशन के दूसरे रीज़न का और यह है चीजों के रॉ मटीरियल्स का प्राइस बढ़ना मानलो सरकार ने कोई नई टैक्स स्कीम लॉन्च की थी, इस वजह से कुछ रॉ मटीरियल्स का दाम बहुत ज्यादा बढ़ गया फ़ॉर एग्ज़ैम्पल मान लेते हैं स्टील जैसे रॉ मटीरीअल का रेट इस वजह से बढ़ गया अब जो भी कंपनी स्टील बेस प्रोडक्ट्स बनाती है उन्हें मजबूरन प्रॉफिट बनाए रखने के लिए अपने प्रोडक्ट्स के रेट भी बढ़ाने पड़ेंगे और इसी वजह से होने वाली इन्फ्लेशन को कहते हैं कॉस्ट पुश इन्फ्लेशन कहते है। मतलब रॉ मटीरियल्स की बढ़ी हुई कॉस्ट की वजह से होने वाली इन्फ्लेशन।

प्रिंटिंग मोर मनी (printing more money)

चलो अब बात करते हैं इन्फ्लेशन के तीसरे रीज़न के बारे में और यह है प्रिंटिंग मोर मनी अब ये इंटरेस्टिंग रीज़न है तो इसे थोड़ा डिटेल में समझते हैं।

अक्सर किसी देश की सरकार उस देश की इकॉनमी को स्टिम्युलेट करने की कोशीश करती है और अपने अलग अलग एजेंडा को पूरा करने के लिए इकॉनमी में मौजूद नोटों की क्वांटिटी को बढ़ा देती है मतलब वो ज्यादा नोट प्रिंट करना शुरू कर देती है जीस वजह से इकॉनमी में मौजूद कैश बढ़ जाता है।

पर इससे होता क्या हैं सिंपल सी लैंग्वेज में बताया जाए तो जहाँ किसी प्रॉडक्ट को खरीदने के लिए पहले इकॉनमी में से 100 नोट मौजूद थे अब उसी प्रॉडक्ट के लिए इकॉनमी में 200 नोट मौजूद हैं क्योंकि 100 नए नोट प्रिंट किए गए हैं तो इस वजह से फिर उस इकॉनमी में इन्फ्लेशन बढ़ जाता है।

पर क्या कभी भी ज़ीरो इन्फ्लेशन हो सकता है, क्या ये पॉसिबल है की चीजें महंगी कभी हो ही ना और क्या ऐसा होना हमारे लिए अच्छा है या बुरा सुनने में भले ही आपको जीरो इन्फ्लेशन थोड़ा अच्छा लगे शायद आपको लगे कि जब चीजें महंगी नहीं होंगी तब आप ज्यादा सैलरी बचा पाओगे और ज्यादा सेविंग भी कर पाओगे पर रिऐलिटी में ऐसा नहीं है ज़ीरो इन्फ्लेशन हम सबके लिए काफी खतरनाक हो सकता है।

सोचो अगर इन्फ्लेशन होगा ही नहीं तो कंपनी सैलरी क्यों बढ़ जाएगी और अगर सैलरी नहीं बढ़ेगी मतलब जब सैलरी नहीं बढ़ेगी तो चीजों के रेट भी नहीं बढ़ेंगे तो लोगों के पास कोई मोटिवेशन ही नहीं रहेगा किसी चीज़ में इन्वेस्ट करने का क्योंकि वो सोचेंगे की रेट तो बढ़ना ही नहीं है तो आज इन्वेस्ट करने का क्या फायदा फिर हो सकता है कि इस वजह से इकॉनमी डिप्रेशन में चले जाए मतलब साल दर साल चीजों का रेट सस्ता होने लगे और अगर ऐसा होता है तो बहुत लोग जो लोग आज ये सोचकर इन्वेस्ट करते है की कल वैल्यू बढ़ जाएगी सो इसलिए आज ही इन्वेस्ट करलो वो लोग ये सोचकर चीजें खरीदना ही बंद कर देंगे कि आने वाले टाइम में जब चीजें और सस्ती हो जाएंगी तो खरीदेंगे।

और इस वजह से फिर उन चीजों की डिमांड कम हो जाएगी न कुछ कंपनी लॉस में चली जाएगी ऐंड कंपनी के लॉस में जाने की वजह से अनएम्प्लॉयमेंट रेट बढ़ जाएगा।

 

जरूर पढ़ें:-

Top 11 बाते जो बताती है कि आप फाइनेंसियल इंटेलीजेंट हो या नहीं

नए लोग स्टॉक मार्किट में Invest कैसे करे | शेअर बाजार का पूरा इतिहास

एक बेहतर पाठक कैसे बनें पढ़ने के 5 नियम | किताबों को प्रभावी ढंग से कैसे पढ़ें

Apple airtags kya hai or kaise kam karta hai

खैर इन्शुर्ड डिप्रेशन एक बहुत ही मजेदार कॉन्सेप्ट है न डिप्लेशन पर मैं बाद में डिटेल लेख भी बनाऊंगा। आप कमेंट में लिखकर हमे बता सकते हो कि आपको इसपर लेख चाहिए या नही।

फिलहाल आप ये समझो कि ज़ीरो इन्फ्लेशन मतलब डिप्रेशन हमारे लिए कोई अच्छी चीज़ नहीं है तो इसका मतलब हुआ कि इन्फ्लेशन हमारे साथ जिंदगी भर रहने वाला है और जब ये इन्फ्लेशन रहने ही वाला है तो चीजें महंगी होती रहेंगी।

तो ये जानना बहुत जरूरी है कि महंगाई के जमाने में अपने पैसों की वैल्यू ये अपने कमाए हुए पैसों की परचेजिंग पावर को कम होने से कैसे बचाएं क्योंकि मानलो आपने 100 रुपये कमाए और आज जो ₹100 आपने कमाए, अगर आप उसको सिर्फ एक सेविंग अकाउन्ट में रख देते हो, जहाँ आपको 100 रुपये पर 2% इंट्रेस्ट मिलता है तो 1 साल बाद 100 रुपये की वैल्यू बढ़कर 102 रुपये हो जाएगी।

पर वही दूसरी तरफ अगर इन्फ्लेशन का रेट 4% है तो कायदे से जो आप आज इन 100 रुपयों से खरीद सकते हो, ठीक उसी चीज़ को खरीदने के लिए आपको अगले साल 104 रुपये की जरूरत पड़ेगी पर अब अगर देखा जाए तो सेविंग्स अकाउंट में रखा हुआ पैसा तो कुछ साल बाद भी आपकी जरूरतें ठीक से पूरी नहीं कर पाएगा, क्योंकि चाहिए आपको 104 रुपये पर आपके पास होंगे सिर्फ 102 रुपये इसलिए इन्फ्लेशन से जीतने का सिर्फ एक ही तरीका है किसी ऐसी जगह पर इन्वेस्ट करना जो आपको इन्फ्लेशन से कई गुना ज्यादा इंटरेस्ट दे।

फॉर एग्ज़ैम्पल अगर इन्फ्लेशन 4% है तो आपकी इन्वेस्टमेंट से आपको कम से कम 8% इन्ट्रेस्ट तो मिलना ही चाहिए और सिर्फ तभी आपका पैसा सही तरीके से ग्रो करेगा और महंगाई को आप पीछे छोड़ पाओगे।

इनशोर्ट अगर आपको इन्फ्लेशन से बचना है तो आपको अपने पैसों को सिर्फ सेव नहीं करना चाहिए बल्कि इन्वेस्ट करना चाहिए और हाँ इन्वेस्ट करने से पहले आपको इन्वेस्टमेंट के बारे में अच्छी नॉलेज ले लेनी चाहिए क्योंकि सिर्फ सोच समझकर की गई इन्वेस्टमेंट सही साबित होती है।

उम्मीद करता हूँ की आपको ये इन्फ्लेशन का कॉन्सेप्ट समझ आया होगा एंड आपको ये Inflation Explained in Hindi | Inflation meaning in hindi लेख पसंद आया होगा। अगर आपको ये लेख पसंद आया है तो इस ब्लॉग को सब्सक्राइब करे एक अछ्यासा कमेंट करें धन्यवाद।

नमस्ते दोस्तों मेरा नाम Akash Sawdekar है the24hindi.com का Author हु। दोस्तों मुझे Internet पर जानकारी पढ़ना बोहत पसंद है, अगर आपको भी मेरी तरा जानकारी पढ़ना अच्या लगता है तो आप इस Site को Subscribe कर सकते हो धन्यवाद।

Leave a Comment